बाबासाहेब स्मारक निर्माण और दादर स्टेशन का नाम बदलने की मांग तेज

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मुंबई, 06 दिसंबर (उदयपुर किरण). डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर गुरुवार, 6 दिसंबर को मुंबई के दादर स्थित चैत्यभूमि में लाखों अनुयायियों की भीड़ ने श्रद्धांजलि अर्पित की. इस साल भी डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के स्मारक को लेकर राजनीति तेज हो गई है. इंदू मिल में प्रस्तावित डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक को लेकर विवाद चल ही रहा है. बाबा साहेब के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने कहा कि राज्य सरकार की नजर इंदू मिल की जमीन पर है, राज्य सरकार वहां स्मारक ही नहीं बनाना चाहती, इसलिए जानबूझकर देरी की जा रही है.

महाराष्ट्र सरकर दिल्ली के इशारे पर चल रही है. केंद्र सरकार भी बाबासाहब का स्मारक निर्माण को लेकर गंभीर नहीं है. इसके अलावा बाबासाहब की प्रतिमा की ऊंचाई को भी 100 फुट तक कम कर दिया गया है. पहले डॉ. आंबेडकर की 350 फुट ऊंची प्रतिमा बनाई जानेवाली थी. गुरुवार को दादर रेल्वे स्टेशन के नाम को बदलने की मांग करते हुए भीम आर्मी की ओर से मोर्चा निकाला गया. पिछले तीन दशकों से दादर रेल्वे स्टेशन के नाम को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर टर्मिनस देने की मांग की जा रही है. हाल ही में एलफिन्सटन रोड को भी बदल कर प्रभादेवी कर दिया गया है.

डॉ. बाबासाहेब प्रतिमा की ऊंचाई को लेकर हो रहे विवाद पर प्रकाश आंबेडकर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बाबासाहब आंबेडकर के स्मारक को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को केंद्र सरकार के निर्देशों को पढ़ लेना चाहिए था. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी ने स्मारक को लेकर जो आदेश पारित कराया था, उस पर भी सीएम को ध्यान देना चाहिए. इससे पहले सुबह मुख्यमंत्री, गवर्नर समेत अन्य मंत्रियों की मौजूदगी में डॉ बाबासाहब को श्रद्धांजलि अर्पित की. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों पर ही राज्य आगे बढ़ रहा है.

बता दें कि इंदू मिल की 12.50 एकड़ जमीन पर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर का स्मारक बनाया जाना है. इस स्मारक के लिए डॉ. आंबेडकर के अनुयायियों के साथ ही राजनीतिक दलों ने कई आंदोलन किए थे. इंदू मिल की जमीन राष्ट्रीय वस्त्रोद्योग महामंडल के अधिकार में थी. केंद्र सरकार के पास इस स्मारक के लिए ज्ञापन भेजा गया था. पिछले साल ही राज्य सरकार ने इस जमीन को अधिग्रहित किया था. इंदू मिल की जगह पर बनाए जानेवाले इस स्मारक में डॉ. आंबेडकर की 350 फुट ऊंची प्रतिमा बनाई जाने वाली है.

इसके साथ ही प्रदर्शन हॉल, चैत्यभूमि तक परिक्रमा मार्ग, बौद्ध स्थापत्य शैली के अनुसार घुमट, शोध केंद्र, व्याख्यान सभागृह, डॉ. आंबेडकर के लिखे पत्र, पुस्तक एवं ग्रंथों को सहेजकर रखा जाएगा. इस स्मारक में बौद्ध धर्म से संबंधित ग्रंथों को सहेजकर रखा जाएगा और विशाल ग्रंथालय बनाया जाएगा. लेकिन अभी तक इस स्मारक की एक ईंट भी नहीं रखी जा सकी है. इससे बाबासाहब के अनुयायियों की नाराजगी बढ़ रही है.

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