देहरादून: जहरीली शराब कांड मामले में कांग्रेस ने मुख्यमंत्री से मांगा इस्तीफा

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देहरादून । जहरीली शराब पीने से राजधानी देहरादून में हुई मौतों के मामले ने कांग्रेस को सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा थमा दिया है। पार्टी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि इस घटना से जाहिर हो गया कि राज्य में सरकार नाम की चीज नहीं है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत विभागों को संभालने में विफल साबित हुए हैं। कांग्रेस मुख्यमंत्री से तत्काल इस्तीफा देने की मांग करती है।

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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने कहा कि सरकार की नाक के नीचे ही जहरीली शराब का धंधा चलना गजब बात है। रुड़की में जहरीली शराब की दुर्भाग्यपूर्ण घटना से सरकार ने कोई सबक नहीं लिया। जनता सरकार की कार्यप्रणाली से अचंभित है। पूरा प्रदेश पहले से ही डेंगू समेत तमाम बीमारियों की चपेट में है। मुख्यमंत्री के पास स्वास्थ्य मंत्रलय है। इस मंत्रलय का बेड़ा गर्क हो चुका है। अब आबकारी विभाग की बड़ी गलती सामने आ गई है। यह विभाग भी मुख्यमंत्री संभाल रहे हैं। यह भी साबित हो रहा है कि मुख्यमंत्री से विभाग संभल नहीं रहे हैं। इस लापरवाही के चलते जनता की मुसीबत बढ़ रही है।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने अवैध शराब पीने से हुई मौतों पर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि रुड़की की घटना से सबक सीखा होता तो यह नौबत नहीं आती। सरकार की नाक के नीचे नकली शराब का कारोबार हो रहा है। यह स्पष्ट हो गया कि इसमें सरकार के कारकून शामिल हैं। उन्होंने प्रति पीड़ित परिवार को 10 लाख क्षतिपूर्ति देने की मांग सरकार से की। प्रदेश प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि देहरादून शहर के बीचोंबीच जहरीली शराब के सेवन से लोगों का मरना गंभीर मामला है। प्रदेश में खुलेआम अवैध शराब की तस्करी हो रही है। उन्होंने सरकार से पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

पथरिया पीर के कई घरों में नहीं जले चूल्हे

पथरिया पीर में जहरीली शराब पीने हुई मौत से इलाके में मातम पसरा है। यहां के अधिकांश घरों में शुक्रवार रात चूल्हे नहीं जले। हर तरफ रोने-बिलखने की आवाजें ही आ रही थीं। पथरिया पीर में किसी का सुहाग उजड़ा तो किसी के बुढ़ापे की लाठी टूट गई।

जहरीली शराब पीने से पथरिया पीर के छह परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। राजेंद्र एक मोबाइल स्टोर में काम करता था, उसके तीन बच्चे हैं और वह एकमात्र घर का कमाने वाला सदस्य था। लल्ला भी छोटी-मोटी नौकरी कर घर का खर्च चलाता था, उसकी अभी दो महीने पहले ही शादी हुई थी। बीवी के हाथ की अभी मेंहदी का रंग भी फीका नहीं पड़ा था और अब उसकी कलाई ही सूनी हो गई। बुजुर्ग सरन का परिवार उसे मिलने वाली पेंशन पर आश्रित था, उसके बेटे-बहू की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। वहीं आकाश लोडर गाड़ी चलाकर परिवार का पेट पालता था, जबकि सुरेंद्र और इंदर दिहाड़ी मजदूरी करते थे। इन सभी के परिवारों के सामने अब आगे की जिंदगी गुजारने का संकट आ खड़ा हुआ है। इलाके की महिलाओं और लोगों का मृतकों के घरों पर देर रात तक जमावड़ा लगा रहा। घटना से लोग इस कदर मर्माहत रहे कि शुक्रवार की रात कई घरों में चूल्हे नहीं जले।

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