दिल्ली-नोएडा-ग्रेटर और फरीदाबाद के मेट्रो यात्रियों को बहुत जल्द ही मिल सकती है ये बड़ी खुशखबरी

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नोएडा-ग्रेटर नोएडा की एक्वा लाइन (Aqua Line Metro) मेट्रो स्टेशनों पर सवारियों की संख्या बढ़ाने की कार्ययोजना पर नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (Noida Metro Rail Corporation) ने काम करना शुरू कर दिया है। मेला आयोजन के जरिये मुसाफिरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। जिन स्टेशनों पर सवारियों की संख्या कम है, उन स्टेशनों पर मेले का आयोजन कर लोगों को आकर्षित किया जाएगा। इसके लिए एनएमआरसी ने कई टीमों का गठन किया है, जो एक्वा लाइन मेट्रो स्टेशनों से सवारियों की संख्या की कमी का कारण तलाश रही हैं।

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रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाएगा कि किसी स्टेशन पर सवारियों की संख्या में इजाफा किया जा सकता है। यहां पर मेला आयोजित कर लोगों को स्टेशन के पास तक लाया जा सके।

यहां पर बता दें कि एक्वा लाइन मेट्रो का संचालन 25 जनवरी को किया गया। संचालन के एक माह बाद मुसाफिरों की संख्या का आकलन किया गया। शुरूआती दौर 13 हजार मुसाफिर प्रतिदिन एक्वा लाइन से सफर करते थे। तीन महीने बाद इस संख्या में 30 फीसद इजाफा होकर मुसाफिरों की संख्या बढ़कर 17 हजार हो गई थी। वर्तमान में इनकी संख्या 20 हजार के आसपास है। यह संख्या संचालन के पहले किए गए सर्वे से काफी कम है। इसका असर एनएमआरसी के राजस्व पर पड़ रहा है। लिहाजा एनएमआरसी ने उन स्टेशनों पर मुसाफिरों का ध्यान आकर्षण करने की योजना बनाई है जिन पर राइडरशिप काफी कम है। इसके लिए दो उपाय सुझाए गए हैं। ऐसे स्टेशनों पर मेलों का आयोजन किया जाए। स्टेशन की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए आसपास की सोसायटी, सेक्टर में लास्ट माइल कनेक्टिविटी दी जाए, ताकि लोग आसानी से मेट्रो स्टेशन पहुंच सके। लास्ट माइल के लिए ई-रिक्शा का संचालन किया जा सकता है।

बेहतर ट्रांसपोर्ट सिस्टम से स्टेशनों को जोड़ने का काम शुरू

गठित सर्वे टीम सोसायटी-सोसायटी जाकर लास्ट माइल कनेक्टिविटी पर काम कर रही है। यहां से सवारियों को कैसे स्टेशन तक बेहतर ट्रांसपोर्ट सेवा उपलब्ध कराई जाए, जिससे अधिक से अधिक सोसायटीवासी एक्वा लाइन मेट्रो का सहारा लेकर दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद तक आ-जा सके। इसी योजना में शुरुआत चरण में सेक्टर-82 और सेक्टर-142 की सोसायटी में सर्वे टीम घूम रही है। इस बात की जानकारी हासिल कर रही है कि किस सोसायटी के कितने लोग प्रतिदिन शहर से बाहर मेट्रो की सवारी के जरिए जा रहे हैं। जो नहीं जा रहे हैं, उसका कारण क्या है। कहां पर सुधार किया जाए कि सवारियां मेट्रो का सहारा लें।

ई-रिक्शा बढ़ाने की दिशा पर विचार

एनएमआरसी और डीएमआरसी के मेट्रो कनेक्टिविटी के लिए बनाए गए पाथ-वे पर भी ई-रिक्शा का संचालन बढ़ाया जाएगा। जिससे अधिक से अधिक सवारियों को लाभान्वित किया जा सके। यहीं नहीं अन्य जगहों व सोसायटी के लिए भी ई-रिक्शा की संख्या में इजाफा करने पर काम किया जा रहा है। अभी सिर्फ 50 ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं, जबकि एक हजार से अधिक ई-रिक्शा का संचालन पूरे रूट पर होना है।

पीडी उपाध्याय (कार्यकारी निदेशक, एनएमआरसी) की मानें तो स्टेशनों की उपयोगिता को बढ़ाने के लिए मेला आयोजन की योजना है। इस पर सर्वे का काम किया जा रहा है। साथ ही लास्ट माइल कनेक्टिविटी को लेकर भी काम किया जा रहा है। 

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