जानिए रजनीकांत के व्यक्तित्व जीवन के बारे में

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नई दिल्ली : ‘फ़िल्म समीक्षक नमन रामचंद्रन ने रजनीकांत की जीवनी को किताब की शक्ल दी है जिसमें 1975 में उनकी पहली फ़िल्म ‘अपूर्व रगंगल’ से लेकर हिंदी फ़िल्मों ‘अंधा कानून’ और ‘हम’ तक के उनके सफर और ‘बिल्ला’, ‘थलपति’ और ‘अन्नामलाई’ जैसी उनके अंदाज वाली फ़िल्मों से ‘बाशा’, ‘मुथू’, ‘शिवाजी’ और ‘एंथिरन’ तक की यात्रा का वृतांत लिखा है। ‘रजनीकांत : द डेफिनिटिव बायोग्राफी’ में रजनी के बचपन के दिनों से लेकर उनके जीवन के संघर्ष के दिनों को भी बयां किया गया है जब शिवाजी राव गायकवाड़ नाम का यह शख्स बस कंडक्टर के कैरियर के बाद फ़िल्मों का सुपरस्टार बना और लोगों के बीच रजनीकांत नाम से मशहूर हो गया। पेंगुइन द्वारा प्रकाशित इस किताब के अनुसार बस यात्रियों को टिकट देने में रजनीकांत से तेज कोई नहीं था।

वह अपने अंदाज में मुसाफिरों को टिकट देते थे और खुले पैसे देते थे। उनके मशहूर अंदाज के चलते ही लोग उनकी बस का इंतज़ार करते थे और सामने से अनेक बसें ख़ाली जाने देते थे। रजनी का यही अंदाज बाद में फ़िल्मों में भी उनकी लोकप्रियता का कारक बना जहां उनके संवाद भी मशहूर हुए। रजनी ने अपने बस कंडक्टर के दिनों को याद करते हुए बयां किया है, ‘मैं साधारण इंसान हूं। बस कंडक्टर से पहले मैं दफ्तर में काम करता था, कुली था और बढ़ई का काम कर चुका था।’ बीटीएस पर रजनीकांत की मुलाकात राजा बहादुर से हुई जिसे वह आज अपना सबसे अच्छा दोस्त बताते हैं। किताब के पन्ने पलटते हुए पता चलेगा कि बस सेवा समाप्त होने के बाद रजनी और राजा अपने अपने घर जाकर थोड़ी देर आराम करते थे।

इसके बाद रजनीकांत हर शाम हनुमंत नगर में राजा के घर पहुंचते और दोनों नाटकों के अभ्यास के लिए निकल जाते जिनका आयोजन वे समय-समय पर बीटीएस संघ के बैनर तले करते थे। दिवंगत रंगकर्मी और अभिनेता शिवाजी गणेशन को याद करते हुए रजनीकांत कहते हैं, ‘मैंने उन्हें देखा, उनकी नकल उतारी। उनकी वजह से मैं सिनेमा जगत् में आया।’ रजनीकांत के जीवन की ऐसी अनेक रोचक कहानियां इस किताब में पढ़ने को मिल जाएंगी। बस कंडक्टर से शुरू होकर दुनिया के अत्यंत पसंदीदा और पूजनीय अभिनेता बनने का सफर तय करने वाले शिवाजी राव गायकवाड़ उर्फ रजनीकांत की कहानी किसी ब्लॉकबस्टर मूवी के लिए बेहतरीन कहानी साबित हो सकती है। हिंदी सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन भी उनकी सादगी के प्रशंसक हैं।

अभिनेता शाहरुख़ खान कहते हैं, “भारतीय सिनेमा में उनके जैसा कलाकार आज तक कोई नहीं हुआ है। इस उम्र में भी उनका उत्साह और उनकी मेहनत देखते ही बनती है। रजनीकांत इतने बड़े स्टार हैं लेकिन उनमें घमंड बिलकुल नहीं है। हम सब को उनसे ये सीखना चाहिए। मुझे गर्व है कि मैं रजनीकांत के दौर में पैदा हुआ हूं।” हिंदी ब्लॉकबस्टर ‘गोलमाल’ के तमिल संस्करण ‘थिल्लु मुल्लु’ में रजनीकांत की बहन की भूमिका निभाने वाली विजी चंद्रशेखर का मानना है कि हर किसी से एक समान व्यवहार करने की क्षमता ने रजनीकांत को यह कद दिया है। विजी ने कहा कि रजनीकांत सेट पर सभी के साथ अत्यंत सम्मान के साथ पेश आते हैं और सभी को बराबर महत्व देते हैं। भले ही वह लाइट ब्यॉय हो या सहायक कलाकार, रजनीकांत किसी से भेदभाव नहीं करते।

विजी ने कहा कि सुपरस्टार हमेशा सफल रहने वाले को नहीं, बल्कि जो सफलता और विफलता का समान रूप से सामना करे और सामान्य बना रहे उसे माना जाता है। फ़िल्म के सेट पर काम के दौरान उनकी सादगी महसूस की। अभिनेत्री ने कहा कि सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रजनीकांत सफलता और विफलता को समान रूप से लेना भलिभांति जानते हैं। तमिल फ़िल्म निर्माता लक्ष्मी रामकृष्णन महसूस करते हैं कि रजनीकांत सुपरस्टार इसलिए हैं, क्योंकि वह यह नहीं मानते कि वह अद्वितीय हैं। रामकृष्णन ने कहा कि रजनीकांत सुपरस्टार कहलाना पसंद नहीं करते, लेकिन वह हैं क्योंकि लोगों ने उन्हें यह बनाया है। सुपरस्टार पैदा नहीं होते, बनते हैं। लेकिन, यदि कोई सुपरस्टार बनने के लिए बुरी तरह हाथ-पांव मारता है तो निश्चित रूप से वह विफल होगा।[

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