जानिए रजनीकांत के जीवन से जुड़ी कुछ खास बातें

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नई दिल्ली : “Rajnikanth” आज आप क्या हो? किस परिवार से हो? कैसे दीखते हो? अगर आप कुछ हासिल करना या किसी लक्ष्य तक पहुचना चाहते है तो इन सभी बेबुनियाद बातो को अपने अंदर से निकाल दीजिये और इस तरह के सवाल के जवाब ढूढ़ना शुरू कर दीजिये। आपने रजनीकांत की सफ़लता के कई किस्से सुने या सुनाये होगे, लेकिन क्या आप जानते है रजनीकान्त ने ये सफ़लता कैसे हासिल की? रजनीकान्त का सही नाम शिवाजीराव गायकवाड़ है। उनका जन्म कर्नाटक के बेंगलोर में एक ग़रीब मराठा परिवार में 12 दिसम्बर, 1949 में हुवा था। रजनीकान्त फ़िल्मी जीवन में आने से पहेले अनाज की बोरियाँ उठाने का काम करते थे और बाद में बस कंडक्टर की नोकरी से अपना जीवन शरु किया।

पर कंडक्टर की नोकरी ने उसकी लाइफ के दरवाजे खोल दिए क्योकि इस नोकरी से रजनीकान्त बहुत ही प्रचिलित हुए। जैसे की उनका बोलने का अलग अंदाज, उसकी सिटी मारने के अलग अलग तरीके लोगो की बहुत ही पसंद आने लगे। रजनीकांत के लिए बस यही एक बेहतर जिंदगी थी उस वक्त और वे काफी खुश थे इस नोकरी से। लोगो को मनोरंजन देना और खुद भी खुश रहना। फिर फ़िल्मी सफ़र के लिए उसे कंडक्टर की नोकरी छोडनी पड़ी। फ़िल्मी अभिनय सिखने के लिए उनके परम मित्र राजा बहादुर ने काफी मदद की। उसके बाद वें साल 1973 में मद्रास फ़िल्म इंस्टिट्यूट से जुड़े, तब से उनकी जिंदगी ही बदल गई। 1975 में बॉलीवुड के साथ जुड़े तब उनकी उम् सिर्फ 25 साल की ही थी।

रजनीकान्त को 1976 में फ़िल्म “अपूर्व रागड्गल” के लिये राष्टीय फ़िल्म अवार्ड से सन्मानित किया गया। रजनीकान्त की हर फ़िल्म में लोगो को कुछ ना कुछ नया देखने को मिलता था जैसे कि उनकी सिगरेट जलाने का अंदाज, चश्मे पहन ने का अंदाज, बोलने का स्टाइल वगेरह सब लोगो को बहुत पसंद आया जिस वजह से उसके नाम के आगे सुपर स्टार का लेबल लग गया और उसके बाद वो “सुपरस्टार रजनी” हो गए। रजनीकान्त की “मुथु” फ़िल्म जापान में 1995 में बहुत ही बड़ी हिट साबित हुई और वही से उसका फ़िल्मी अवतार शुरू हुआ। आज रजनी नाम के ब्रांड जापन में लोकप्रिय है। कई जापानी उसको चाहने वाले है|

जापन की कंपनी टोहटो ने अपने खाद्य प्रदाथो में रजनीकान्त की “मुथु” फ़िल्म का पोस्टर लगाकर बेच रहे है और इसी कारण वो अच्छे से बिक भी रही है, यह बिस साल पहले की बात है। रजनीकान्त की अन्य फ़िल्म की सफलता “मुथु” फ़िल्म के बाद भी जापन में जारी है। उसके बाद फ़िल्मी सिलसिला शुरू हुआ और रजनीकान्त ने भारत की लगभग सारी भाषा में फिल्म की। रजनीकान्त ने बॉलीवुड में हिंदी, तेलगु, कनड, तामील, मलयालम, बंगाली और हॉलीवुड की फिल्मो में काम किया, जिस वजह से देश के कोने कोने में उसको चाहने वाले है। रजनीकान्त ने इतनी सफ़लता हासिल की है कि उनको “दी लीजेंड ऑफ़ सिनेमा” कहना गलत नहीं होगा।

वें बतोर अभिनेता के अलावा फ़िल्म निर्माता और फ़िल्म की कहानी लिखने में भी अपना हाथ अजमाया और सफ़ल भी हुये। उनको अपने इस काम के बदोलत भारत सरकार ने कला शेत्र में साल 2000 में पद्मविभूषण अवार्ड से सन्मानित किया। आपने देखा होगा कि एक मामूली सा लड़का अपने टेलेंट और अपने हौसले की वजह से कहा तक पहुच गया। अब अगर रजनीकान्त ये सोचता कि में गरीब हु, ज्यादा पढ़ा लिखा नहीं हु, में कुछ भी नहीं कर सकता तो आज वो कहा होते? जहा पर आज आप खड़े है। समुन्दर के पंछियो के पास कहा नक़्शे होते है पर फिर भी वो अपने रास्ते ढूढ लेते है।

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