जानिए किस दिन और कैसे रखा जाएगा प्रदोष व्रत, विस्तार में पढ़ें विधि

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जानिए किस दिन और कैसे रखा जाएगा प्रदोष व्रत, विस्तार में पढ़ें विधि 

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जयपुर। भगवान शिव की पूजा आराधना का दिन माना जाता है प्रदोष का व्रत भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ दिन माना जाता है। शास्त्रों में माना जाता है कि प्रदोष के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करने से जीवन में आने वाली परेशानियों से छुटकारा मिलता है।

शास्त्रों में त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत का दिन माना जाता है। जून माह में प्रदोष व्रत 14 जून के दिन किया जाएगा, इसके साथ ही दूसरा प्रदोष का व्रत इस माह की 30 जून को होगा।

प्रदोष व्रत में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना की जाती है। प्रदोष के व्रत में भगवान शिव की पूजा शाम को सूर्यास्त से ठीक पहले की जाती है। इस पूजा को करने के लिए पहले स्नान कर साफ कपडें धारण किये जाते हैं व उत्तर-पूर्व की ओर मुंह करके पूजा स्थान में बैठा जाता है।

पूजा के लिए पांच रंगों से रंगोली बना कर पंचामृत से भगवान शिव का अभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप करते हुए शिव का अभिषेक करने के बाद विधिवत पूजा करें और भगवान शिव को भोग लगाएं।
प्रदोष का व्रत करने से शिव की कृपा प्राप्त होती है साथ ही जीवन से आर्थिक संकटों का निवारण होता है। इस व्रत के शुभ प्रभाव से रोगों से मुक्ति मिलती है।

प्रदोष व्रत के प्रभाव से अविवाहित लड़के-लड़कियों को योग्य जीवन साथी मिलता है, इस व्रत के प्रभाव से समृद्धि और सौभाग्य का वरदान भी मिलता है साथ ही लंबी आयु और पुत्र की कामना भी पूरी होती है।

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