आस्था का केंद्र पवित्र कैलास भू-क्षेत्र में नेस्को ने विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की दी मंजूरी

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पवित्र कैलास भू-क्षेत्र के संरक्षण की दिशा में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने पर सहमति प्रदान करने के साथ ही अंतरिम सूची में भी शामिल कर लिया है। जो प्रस्ताव तैयार किया गया है उसके अनुसार अंतरराष्ट्रीय महत्व वाले इस क्षेत्र को प्राकृतिक के साथ ही सांस्कृतिक (मिश्रित) श्रेणी की संरक्षित धरोहर का दर्जा मिलेगा।  

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पवित्र कैलास भूक्षेत्र भारत समेत चीन व नेपाल की संयुक्त धरोहर है। इसे यूनेस्को संरक्षित विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए चीन व नेपाल पहले ही अपने प्रस्ताव यूनेस्को को भेज चुके थे। अब भारत ने भी इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए अपने हिस्से वाले 7120 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल को यूनेस्को से प्रारंभिक मंजूरी प्रदान करा दी है। 

इस तरह कुल 31 हजार 252 वर्ग किलोमीटर भाग यूनेस्को की अंतरिम सूची में शामिल हो गया है। यह काम देहरादून में स्थापित यूनेस्को के उस कैटेगरी-दो सेंटर के माध्यम से किया गया। इस पर एशिया पैसिफिक क्षेत्र के देशों की प्राकृतिक धरोहरों को वैश्विक फलक पर पहचान दिलाने की जिम्मेदारी है।

कैटेगरी सेंटर के निदेशक डॉ. वीबी माथुर ने दैनिक जागरण को बताया कि नेपाल की अंतरराष्ट्रीय संस्था इसीमोड और उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र आदि ने इसमें अहम भूमिका निभाई। उन्होंने बताया कि अंतरिम सूची में पवित्र कैलास भूक्षेत्र को स्थान मिल जाने के बाद नियमानुसार एक साल तक विभिन्न स्तर पर काम करना होता है। इसके बाद मुख्य प्रस्ताव बनाकर यूनेस्को को भेजेंगे और फिर इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की कार्रवाई को अंतिम रूप दिया जाएगा।  

यूसैक की सेटेलाइट मैपिंग का अहम योगदान

उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) के निदेशक डॉ. एमपीएस बिष्ट ने बताया कि पवित्र कैलास भूक्षेत्र की प्राकृतिक व सांस्कृतिक विविधता और इसमें आ रहे बदलाव को लेकर उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने 14 सेटेलाइट मैप तैयार किए हैं। इसमें समाहित तथ्यों के आधार पर यूनेस्को के कैटेगरी-दो सेंटर को बेहतर प्रस्ताव बनाने में खासी मदद मिली।

बेहतर होगी इससे  यात्रा

भारत, चीन व नेपाल के साझा प्रयासों से कैलास भूक्षेत्र को विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने की कवायद अपने अंतिम पड़ाव पर है। इससे न सिर्फ समूचे भूक्षेत्र का विकास होगा, बल्कि कैलास मानसरोवर यात्रा भी बेहतर होगी।

यात्रा मार्ग का विकल्प खुला छोड़ा

यूनेस्को कैटेगरी-दो सेंटर के साथ ही भारतीय वन्यजीव संस्थान के निदेशक डॉ. माथुर ने बताया कि कैलास मानसरोवर के यात्रा मार्ग को प्रारंभिक प्रस्ताव में अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हालांकि, उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के मार्ग को ही सबसे बेहतर बताया गया है। फिर भी इस पर और विचार विमर्श कर अंतिम रूप दिया जाएगा। 

यात्रा का अधिकांश हिस्सा भारत में

-भारत में कुल यात्रा मार्ग 1433 किलोमीटर का है। जिसमें 127 किमी पैदल व 1306 किमी यात्रा वाहन से की जाती है। कुल 1433 किमी की यात्रा में 14 दिन लगते हैं।

-चीन सीमा में कुल 464 किमी की यात्रा में 53 किमी पैदल व 411 किमी वाहन से की जाती है। कुल 464 किमी की यात्रा में 12 दिन का समय लगता है।

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